Thursday, February 18, 2021

लम्हे


मुठी भरी रेतसी है ये ज़िन्दगी 

हर पल हाथसे छूटती.. 

बटोर लो उन लम्हों को आज 

जिन्हे सांसे है बुनती  


आज हमे जो दे रहा है,

कल वो शायद न हो 

जो लम्हे कल जिए थे,

वो आज हो न हो 


चंद लम्हे मिलती है हसी 

आंसुओ के संग पिलो कभी 

ख्वाबों के अस्तर तले 

इनके साथ भी जिलों कभी 


ज़िन्दगी में पाए कुछ मोती 

यादों में समेट लो इन्हे 

कुछ लम्हे हमारे साथ है 

क्यों न हसके जिलें इन्हे. 


---परिणीता (१८/०२/२०२१)


Friday, February 5, 2021

मजबूर

इतना मजबूर न कर प्यार मे, 

की जीना नामुमकिन हो जाए.

इतना न दूर कर मुझे 

की सांस लेना दुश्वार हो जाए.

तेरे साथ जीने की ख्वाइश है मेरी  

कही ये ख्वाइश, आरज़ू न बन जाए.

कैसी ये बेबसी

उसका दर्द मेरे आँखों से बह जाए.

रोकलु अपने कदम, जो तुझ तक जाते है

रस्ते तो चल पड़े थे, कही मंज़िल न खो जाए.

हालात का वास्ता देता है वक़्त 

वक़्तसे केहदो, किसी दिन ये भी ख़त्म हो जाए.

क्या कहोगे उन दिलोंसे

जो साथ धड़कना न भूल पाए.

क्या यही है मोहब्बत,  

जो कभी मिलकर भी न मिल पाए?


---परिणीता (२५/०१/२०२१)