Friday, February 5, 2021

मजबूर

इतना मजबूर न कर प्यार मे, 

की जीना नामुमकिन हो जाए.

इतना न दूर कर मुझे 

की सांस लेना दुश्वार हो जाए.

तेरे साथ जीने की ख्वाइश है मेरी  

कही ये ख्वाइश, आरज़ू न बन जाए.

कैसी ये बेबसी

उसका दर्द मेरे आँखों से बह जाए.

रोकलु अपने कदम, जो तुझ तक जाते है

रस्ते तो चल पड़े थे, कही मंज़िल न खो जाए.

हालात का वास्ता देता है वक़्त 

वक़्तसे केहदो, किसी दिन ये भी ख़त्म हो जाए.

क्या कहोगे उन दिलोंसे

जो साथ धड़कना न भूल पाए.

क्या यही है मोहब्बत,  

जो कभी मिलकर भी न मिल पाए?


---परिणीता (२५/०१/२०२१)

  


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