इतना मजबूर न कर प्यार मे,
की जीना नामुमकिन हो जाए.
इतना न दूर कर मुझे
की सांस लेना दुश्वार हो जाए.
तेरे साथ जीने की ख्वाइश है मेरी
कही ये ख्वाइश, आरज़ू न बन जाए.
कैसी ये बेबसी
उसका दर्द मेरे आँखों से बह जाए.
रोकलु अपने कदम, जो तुझ तक जाते है
रस्ते तो चल पड़े थे, कही मंज़िल न खो जाए.
हालात का वास्ता देता है वक़्त
वक़्तसे केहदो, किसी दिन ये भी ख़त्म हो जाए.
क्या कहोगे उन दिलोंसे
जो साथ धड़कना न भूल पाए.
क्या यही है मोहब्बत,
जो कभी मिलकर भी न मिल पाए?
---परिणीता (२५/०१/२०२१)
क्या बात....
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